Sunday, November 18, 2007

वन्दे मातरम्


वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां
मलयजशीतलाम्
सस्यश्यामलां मातरम्
वन्दे मातरम्


शुभ्रज्योत्स्नां पुलकितयामिनीम्
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीम्
सुहासिनीम्
सुमधुरभाषिणीम्
सुखदां वरदां मातरम्
वन्दे मातरम् ॥

3 comments:

दिवाकर मणि said...

तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे ना रहें.

"परमवैभवन्नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।"

---भारत माता की जय---

mahashakti said...

दिवाकर मणि जी के माध्‍यम से आपका ब्‍लाग देखा संस्‍कृत में काम होते देख कर अच्‍छा लगा। मैने आपके ब्‍लोग का लिंक अपने दोनो ब्‍लाग पर दे दिया है।

http://pramendra.blogspot.com
http://mahashaktigroup.blogspot.com

mahendra said...

good starting in new way from new centre