पावने श्रावणे शुक्ले पक्षे एकादशीतिथौ । _________________________________
प्रातःकाले भुविप्राप्तः सोऽहमस्मि दिवाकरः ॥१॥ ____________________________
शैशवे धृतगाम्भीर्यः कौमारे शान्तिवृत्तिकः । _______________________________
मितभाषी स्वभावेन सोऽहमस्मि दिवाकरः ॥२॥ _____________________________
मेरा जन्मस्थान ८८००० ऋषियों की तपःस्थली नैमिषारण्य के निकट सीतापुर जनपद में है | उसी नगर में माध्यमिक शिक्षा प्राप्तकर अवध प्रान्त की राजधानी मे स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक स्तरीय शिक्षा प्राप्त करके जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एम ए करने के बाद वहीं शोधच्छात्र के रूप में अध्ययन कर रहा हूं |
3 comments:
तेरा वैभव अमर रहे माँ हम दिन चार रहे ना रहें.
"परमवैभवन्नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।"
---भारत माता की जय---
दिवाकर मणि जी के माध्यम से आपका ब्लाग देखा संस्कृत में काम होते देख कर अच्छा लगा। मैने आपके ब्लोग का लिंक अपने दोनो ब्लाग पर दे दिया है।
http://pramendra.blogspot.com
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good starting in new way from new centre
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