पावने श्रावणे शुक्ले पक्षे एकादशीतिथौ । _________________________________
प्रातःकाले भुविप्राप्तः सोऽहमस्मि दिवाकरः ॥१॥ ____________________________
शैशवे धृतगाम्भीर्यः कौमारे शान्तिवृत्तिकः । _______________________________
मितभाषी स्वभावेन सोऽहमस्मि दिवाकरः ॥२॥ _____________________________
मेरा जन्मस्थान ८८००० ऋषियों की तपःस्थली नैमिषारण्य के निकट सीतापुर जनपद में है | उसी नगर में माध्यमिक शिक्षा प्राप्तकर अवध प्रान्त की राजधानी मे स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक स्तरीय शिक्षा प्राप्त करके जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में एम ए करने के बाद वहीं शोधच्छात्र के रूप में अध्ययन कर रहा हूं |
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